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परिवार वाली तकरार   ब्याज दरों के मसले पर सरकार और आरबीआइ के बीच वैचारिक टकराव को ज्यादा तूल देने की जरूरत नहीं है। पहले भी ऐसी उलझने आई हैं जो समय के साथ सुलझ भी गईं   प्रणव सिरोही  पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआइ ने ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं की। उधर सरकार को ब्याज दरें घटने की उम्मीद थी। स्पष्ट है कि आरबीआइ ने दरें तय करने में सरकारी संकेतों को तवज्जो नहीं दी। यहां तक सब ठीक है। अक्सर ऐसा होता भी आया है, मगर बेहद मितभाषी और सुर्खियों से दूर रहने वाले रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के इस मौके पर एक बयान ने खासी हलचल पैदा कर दी। उन्होने सार्वजनिक रूप से कहा कि सरकार की इच्छा के बावजूद मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी सदस्यों ने वित्त मंत्रालय के साथ मुलाकात करने से इन्कार कर दिया। आरबीआइ के इस रुख पर उसी दिन शाम को सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के तल्ख बयान से मामले ने और तूल पकड़ लिया। अखबारों को अगले दिन के लिए पहले पन्ने की खबर मिल गई कि सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।   कहते ...